Environmental Issues को समझने से पहले हमे समझना होगा कि environment क्या है।
पर्यावरण का अर्थ है हमारे चारों ओर का वह प्राकृतिक और कृत्रिम वातावरण जिसमें हम रहते हैं। इसमें भूमि, जल, वायु, जीव-जंतु, पेड़-पौधे और अन्य सभी प्राकृतिक तत्त्व (natural elements) शामिल होते हैं।

पर्यावरण का महत्व:-
• यह हमें शुद्ध हवा, पानी और भोजन प्रदान करता है।• पर्यावरण का संतुलन बनाए रखना हमारे health के लिए जरूरी है। वन और प्राकृतिक संसाधन हमारे जीवन को ऊर्जा और संसाधन (resources)प्रदान करते हैं।
• प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन से पर्यावरण को नुकसान (harm) पहुँचता है, जिससे जीवन संकट में आ सकता है।
जलवायु किसी स्थान के दीर्घकालिक मौसम के औसत को दर्शाती है। इसमें तापमान, आर्द्रता (humidity), वर्षा और हवाओं के pattern शामिल होते हैं।
जलवायु का महत्व:–
• यह कृषि, फसलों और खाद्य उत्पादन को प्रभावित करती है।• जलवायु परिवर्तन का प्रभाव समुद्रों के स्तर (sea level), प्राकृतिक आपदाओं और पारिस्थितिक तंत्र (ecosystem)पर पड़ता है।
• जलवायु का संतुलन बनाए रखने से पृथ्वी पर जीवन संभव रहता है।पर्यावरण और जलवायु दोनों का संरक्षण आवश्यक है ताकि आने वाली पीढ़ियों को एक सुरक्षित और स्वस्थ दुनिया मिल सके।
पर्यावरणीय समस्याएँ (Environmental Issues) क्या हैं?
Environmental Issues वे संकट या चुनौतियाँ हैं जो प्राकृतिक संतुलन (natural balance)को प्रभावित करती हैं और जीवन के लिए खतरा पैदा करती हैं। ये समस्याएँ मानव गतिविधियों या प्राकृतिक कारणों से उत्पन्न (occur)हो सकती हैं।
मुख्य पर्यावरणीय समस्याएँ और उनके प्रभाव:–
• जलवायु परिवर्तन (Climate Change) – ग्लोबल वार्मिंग, मौसम में असामान्य परिवर्तन, सूखा, बाढ़ और चक्रवात जैसी समस्याएँ।

• वायु प्रदूषण (Air Pollution) – वाहनों (vehicles), कारखानों (industries)और जलते ईंधन (burning fuel)से निकलने वाला धुआँ जो health को नुकसान पहुँचाता है।

• जल प्रदूषण (Water Pollution) – उद्योगों और प्लास्टिक कचरे से नदियों, झीलों और समुद्रों का दूषित होना।
• भूमि और मृदा प्रदूषण (Soil Pollution) – रसायनिक खाद, प्लास्टिक और औद्योगिक कचरे (industrial waste)मिट्टी की गुणवत्ता (Soil fertility) का नष्ट होना।
• वनों की कटाई (Deforestation) – पेड़ों की अत्यधिक कटाई से जलवायु परिवर्तन, मिट्टी का कटाव ( soil erosion)और जैव विविधता (Biodiversity)का नुकसान।

• प्राकृतिक संसाधनों की कमी (Resource Depletion) – जल, कोयला, तेल और खनिज (minerals) जैसे संसाधनों का अत्यधिक दोहन।
• जैव विविधता संकट (Biodiversity Loss) – जीव-जंतुओं की प्रजातियों का विलुप्त होना, जिससे पारिस्थितिक संतुलन (ecosystem balance) बिगाड़ते है।
• प्लास्टिक प्रदूषण (Plastic Pollution) – समुद्रों, नदियों और भूमि पर प्लास्टिक कचरे का बढ़ता स्तर।
• कचरा प्रबंधन की समस्या (Waste Management Issues) – ई-कचरा, मेडिकल कचरा और शहरी कचरे का अनुचित निपटान।
• ओजोन परत का क्षय (Ozone Layer Depletion) – हानिकारक गैसों के कारण ओजोन परत में छेद जिससे पराबैंगनी (UV) किरणें सीधे पृथ्वी तक पहुँचती ।

पर्यावरणीय मुद्दों की हानि (Loss of Environmental Issues) से मतलब है कि जब हम पर्यावरण से जुड़े समस्याओं को नज़रअंदाज़ करते हैं या उनका सही तरीके से समाधान नहीं करते, तो इससे होने वाले नुकसान।
ये loss इस प्रकार हैं:-
जलवायु परिवर्तन (Climate Change):- ग्लोबल वार्मिंग के कारण तापमान में लगातार वृद्धि। बर्फ की चादरों और ग्लेशियरों का पिघलना। समुद्र के स्तर में वृद्धि और तटीय क्षेत्रों का डूबना।
• सूखा, बाढ़, चक्रवात जैसी आपदाओं की आवृत्ति और तीव्रता में वृद्धि।
• जैव विविधता की हानि (Biodiversity Loss):- जानवरों और पौधों की अनेक प्रजातियों का विलुप्त होना।• पारिस्थितिकी तंत्र का असंतुलन और खाद्य श्रृंखला का टूटना।• परागण करने वाले कीटों की कमी, जिससे कृषि पर नकारात्मक प्रभाव।
• वनों की कटाई (Deforestation):- जंगलों का काटा जाना जिससे वन्य जीवन का नुकसान। कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करने की क्षमता में कमी। मिट्टी का कटाव और भूमि की उर्वरता में कमी।
• वायु प्रदूषण (Air Pollution):- औद्योगिक धुएं, वाहनों और जीवाश्म ईंधन के जलने से वायु की गुणवत्ता में गिरावट। सांस से जुड़ी बीमारियाँ जैसे अस्थमा और कैंसर।
• जल प्रदूषण (Water Pollution):– नदियों, झीलों और समुद्रों में रासायनिक और प्लास्टिक कचरे का बढ़ना। पीने के पानी की गुणवत्ता में कमी और जल जनित रोगों का प्रसार।
• मिट्टी का क्षरण (Soil Degradation):- रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता में कमी। बंजर भूमि का विस्तार और कृषि उत्पादन में गिरावट।
• प्लास्टिक प्रदूषण (Plastic Pollution):- प्लास्टिक कचरे का महासागरों में जमा होना। समुद्री जीवों की मौत और खाद्य श्रृंखला में माइक्रोप्लास्टिक का प्रवेश।
• प्राकृतिक संसाधनों की कमी (Resource Depletion):- कोयला, पेट्रोलियम, पानी आदि का अत्यधिक दोहन। भावी पीढ़ियों के लिए संसाधनों की कमी।
• महासागर अम्लीकरण (Ocean Acidification):- समुद्रों में CO2 के अधिक अवशोषण से अम्लीयता में वृद्धि। कोरल रीफ और समुद्री जीवन पर बुरा प्रभाव।
• मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव (Impact on Human Health):- प्रदूषण के कारण बीमारियाँ जैसे कैंसर, अस्थमा, और हृदय रोग। साफ पानी और स्वच्छ हवा की कमी।